फूलों की घाटी | the valley of flowers

फूलों की घाटी, खोज, वन्य जीव, यात्रा का समय, ट्रैकिंग, पहुंचने का मार्ग, नंदा देवी नेशनल पार्क और बायोस्फीयर रिजर्व | (the valley of flowers, wildlife,  best trek time, travelling route, nanda devi national park/ biosphere reserve)

        सुंदर और विशाल हिमालय की ओट में प्रकृति द्वारा बसाई, फूलों की घाटी आश्चर्यजनक और सुंदर दृश्य प्रकट करती है  तथा यहां आने वाले आगंतुकों के लिए कभी ना भूलने वाला अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करती है । फूलों की घाटी उत्तराखंड राज्य के चमोली जनपद में 87 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली है यह नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व का भाग है तथा इसे 1982 में नेशनल पार्क के रूप में स्थापित किया गया ।

स्थानीय लोगों के बीच इस घाटी को भ्यूंडार घाटी के नाम से जाना जाता है । यह घाटी पुष्पावती नदी के समीप स्थित है तथा इसमें जुलाई-अगस्त के महीनों में विभिन्न प्रजातियों के पुष्प खिलते हैं । यहां पर विदेशी फूलों की 600 से अधिक प्रजातियां भी पाई जाती है जिनमें आर्केड, मेरीगोल्ड, पौपीज जैसे पुष्प पाए जाते हैं।

the valley of flowers

फूलों की घाटी की खोज – search of the valley of flowers

फूलों की घाटी को विश्व के समक्ष लाने का श्रेय कामेट पर्वत शिखर के पर्वतारोही एवं वनस्पतिशास्त्री फ्रेंक सिडनी स्माइथ को जाता है । माना जाता है कि 1931 में तीन ब्रिटिश पर्वतारोही फ्रैंक स्माइथ के नेतृत्व में अपना रास्ता भटक कर इस शानदार घाटी पर पहुंचे थे । इसकी सुंदरता से प्रभावित होकर उन्होंने इसे फूलों की घाटी नाम दिया ।

फ्रैंक ने “वैली ऑफ फ्लावर्स” नामक पुस्तक लिखकर 1947 में पहली बार विश्व का ध्यान फूलों की इस अद्भुत घाटी की ओर आकर्षित किया । इस घाटी को रामायण में वर्णित संजीवनी पर्वत से भी जोड़ा जाता है।

फूलों की घाटी में वन्य जीव | wildlife in the valley of flowers

यहां वन्यजीवों में हिमालयन काला भालू, कस्तूरी मृग ,स्नो लेपर्ड, गुलदार, भरल आदि पाए जाते हैं । दुर्लभ और विशेष वन्यजीव प्रजातियों में ग्रे लंगूर, उड़ने वाली गिलहरी, कालाभालू, लाल लोमड़ी, लाइम बटरफ्लाई, हिमालय तेंदुआ तथा हिमालय वीजल आदि पाए जाते हैं । अनेक रंग बिरंगी तितलियां भी यहां पाई जाती हैं।

फूलों की घाटी विश्व धरोहरस्थल | World heritage the valley of flowers

14 जुलाई 2005 को यूनेस्को ने फूलों की घाटी को विश्व धरोहर घोषित किया हिमालय की इस धरोहर का अस्तित्व फूलों के साथ साथ यहां उगने वाली पुष्पयुक्त खरपतवार पोलीगोमन के कारण संकट में है, क्योंकि यह वनस्पति अपने आसपास किसी भी फूल के पौधे को पनपने नहीं देती । नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान में प्रतिवर्ष जून से सितंबर तक एक अभियान चलाकर इस खरपतवार को हटाने का कार्य किया जाता है।

फूलों की घाटी में यात्रा का समय | best time for valley of flowers trek

फूलों की घाटी में खिले हुए आकर्षक फूलों का दर्शन मई से अक्टूबर महीनों के बीच किया जा सकता है । इस दौरान यह क्षेत्र एक आकर्षक स्वप्नलोक के समान अविस्मरणीय नजर आता है । फूलों की सर्वाधिक प्रचुरता जुलाई से सितंबर के मध्य में होती है।

फूलों की घाटी की ट्रैकिंग |  the valley of flowers trek

हिमालय की सुंदर पहाड़ियों, झरनों, फूलों और प्राकृतिक सांस्कृतिक विरासत से प्रचुर फूलों की घाटी भारत के सबसे आकर्षक ट्रैक में से एक है । इसकी समुद्र तल से ऊंचाई 3600 मीटर है । मानसून के समय यह घाटी फूलों के रंग-बिरंगे रंगों और सुगंध से भर उठती है लगभग 500 से अधिक फूलों की प्रजातियां मानसून के दौरान खिल उठती है जिनमें हिमालय का प्रसिद्ध व दुर्लभ ब्रह्म कमल भी है जो कि उत्तराखंड का राज्य पुष्प भी है।

यह ट्रैक इसलिए भी आकर्षक है क्योंकि यह एक विश्व विरासत स्थल तो है ही साथ ही भारत के सबसे प्राचीन ट्रैकिंग रूटों में एक भी है । यहां की ट्रैकिंग अवधि भी अधिक दिनों की है । वहीं हेमकुंड साहिब की कठिन चढ़ाई भी इसे अन्य ट्रैकिंग रूट से विशेष बनाती है ।

फूलों की घाटी तक पहुंचने का मार्ग

दिल्ली से देहारादून /हरिद्वार

फूलों की घाटी तक यात्रा के लिए सर्वप्रथम देहरादून या हरिद्वार पहुंचना आवश्यक है । यहां सड़क मार्ग और रेलवे दोनों से पहुंचा जा सकता है । हवाई मार्ग के यात्रियों हेतु जौलीग्रांट हवाई अड्डा निकटतम हवाई मार्ग है। यहां से चमोली के लिए हेलीकॉप्टर सेवा भी बुक की जा सकती है । दिल्ली से देहरादून की दूरी 240 किलोमीटर है।

देहारादून /हरिद्वार से गोविंदघाट

देहरादून से सड़क मार्ग से गोविंदघाट जो कि 310 किलोमीटर की दूरी पर है, 10 से 11 घंटे में पहुंचा जा सकता है।जहां मार्ग में देवप्रयाग नंदप्रयाग और कर्णप्रयाग जैसे दर्शनीय स्थल पढ़ते हैं।

गोविंदघाट से घंगरिया (ghangaria)

गोविंदघाट से ही वास्तव में ट्रैकिंग का प्रारंभ होता है । यहां से घंगरिया (ghangaria) तक 15 किलोमीटर का ट्रैक है ।घंगरिया(ghangaria) फूलों की घाटी और हेमकुंड साहिब दोनों के लिए बेस कैंप है ।

घंगरिया (ghangaria) से फूलों की घाटी

फूलों की घाटी घंगरिया से 4 किलोमीटर दूर है यह रास्ता घने जंगल और पहाड़ी से होकर गुजरता है रास्ते में विभिन्न रंगों के फूलों को देखा जा सकता है यह घाटी 2 किलोमीटर चौड़ी और 10 किलोमीटर लंबी है ।

नंदा देवी नेशनल पार्क और बायोस्फीयर रिजर्व

नंदा देवी नेशनल पार्क 630 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है यह उत्तराखंड राज्य केचमोली जिले में नंदा देवी पर्वत के गिरी बाद का क्षेत्र है इस नेशनल पार्क की स्थापना 1982 में की गई थी।नंदा देवी शिखर के प्रथम बार सफल आरोहण का श्रेय ब्रिटिश पर्वतारोही एरिक शिपटन तथा बिल टिलमैन को जाता है।

2004 में यूनेस्को द्वारा नंदा देवी नेशनल पार्क और फूलों की घाटी नेशनल पार्क क्षेत्र को बायोस्फीयर रिजर्व घोषित कर दिया । नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व उत्तराखंड का एकमात्र बायोस्फीयर रिजर्व है । इसके अंतर्गत 5860 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र आता है । इसका विस्तार चमोली पिथौरागढ़ तथा बागेश्वर जनपदों में है । नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व IUCN के मैन एंड बायोस्फीयर कार्यक्रम (MAN) के अंतर्गत भी सम्मिलित है।

जैव विविधता- नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व में दुर्लभ जड़ी बूटियां हिमालयी वनस्पति- फर, स्प्रूस, भोजपत्र, बुरांश, बाँज आदि के वृक्ष प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं । वन्य जीवो में भरल, कस्तूरी मृग, मोनाल स्नो काक , काला भालू, स्नो लेपर्ड आदि पाए जाते हैं।

चिंताएँ और समाधान

          फूलों की घाटी उत्तराखंड ही नहीं वरन पूरे भारतवर्ष में पर्यटन, प्राकृतिक सुंदरता, और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से एक विशेष महत्व रखती है । इसका रखरखाव और प्रचार-प्रसार क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूत करता है यहां पर भारत से ही नहीं वरन विश्व भर से पर्यटक आते हैं ।

हाल के वर्षों में जलवायु परिवर्तन और अति मानवीय हस्तक्षेप से क्षेत्र की पारिस्थितिकी और वन्य जीवन को व्यापक नुकसान भी पहुंचा है । इसीलिए आवश्यकता है कि इसके पारिस्थितिकी संवेदनशीलता को ध्यान में रखकर ही विकास कार्यों और पर्यटन गतिविधियों को अनुमति दी जाए तथा आने वाले पर्यटकों को भी क्षेत्र की स्वच्छता और संरक्षण के संबंध में जागरूक किया जाए और नियमों का उल्लंघन करने वाले लोगों पर दंड की व्यवस्था भी की जाए ।

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